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डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है? | कब कराया जाता है, क्यों जरूरी है, रिपोर्ट का मतलब और पूरी जानकारी

डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है? | कब कराया जाता है, क्यों जरूरी है, रिपोर्ट का मतलब और पूरी जानकारी

By - Max Lab

Updated on: Sep 09, 2025 | 20 min read

Table of Contents

    परिचय

    गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान मां और बच्चे की सेहत की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण टेस्ट है डबल मार्कर टेस्ट (Double Marker Test)। यह टेस्ट गर्भ में पल रहे शिशु में कुछ जेनेटिक (Genetic) या क्रोमोसोमल (Chromosomal) समस्याओं के जोखिम का पता लगाने के लिए किया जाता है।

    अक्सर लोग Google पर "डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है?", "डबल मार्कर टेस्ट कब होता है?", "डबल मार्कर टेस्ट क्यों किया जाता है?" और "डबल मार्कर टेस्ट की रिपोर्ट कैसे समझें?" जैसे सवाल खोजते हैं। इस लेख में हम इन सभी सवालों के आसान और सरल जवाब देंगे।


    डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है?

    डबल मार्कर टेस्ट गर्भावस्था की पहली तिमाही (First Trimester) में किया जाने वाला एक ब्लड टेस्ट है। यह टेस्ट मां के खून में मौजूद दो महत्वपूर्ण प्रोटीन और हार्मोन की मात्रा को मापता है।

    ये दो मार्कर हैं:

    • Free Beta hCG
    • PAPP-A (Pregnancy Associated Plasma Protein-A)

    इन दोनों की रिपोर्ट को मां की उम्र, गर्भावस्था के सप्ताह (Pregnancy Week) और NT Scan के साथ मिलाकर देखा जाता है। इससे डॉक्टर यह अनुमान लगाते हैं कि बच्चे में कुछ जन्मजात या क्रोमोसोम से जुड़ी बीमारियों का जोखिम अधिक है या नहीं।

    ध्यान रखें:
    डबल मार्कर टेस्ट किसी बीमारी की पुष्टि (Confirm) नहीं करता। यह केवल जोखिम (Risk) बताता है।


    डबल मार्कर टेस्ट क्यों किया जाता है?

    डॉक्टर यह टेस्ट इसलिए करवाते हैं ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे में कुछ क्रोमोसोमल समस्याओं का खतरा है या नहीं, इसका पता लगाया जा सके।

    यह टेस्ट मुख्य रूप से इन स्थितियों के जोखिम का आकलन करता है:

    • डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome - Trisomy 21)
    • एडवर्ड सिंड्रोम (Edwards Syndrome - Trisomy 18)
    • पटाउ सिंड्रोम (Patau Syndrome - Trisomy 13)

    यदि रिपोर्ट में जोखिम अधिक आता है, तो डॉक्टर आगे की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।


    डबल मार्कर टेस्ट कब कराया जाता है?

    डबल मार्कर टेस्ट कराने का सही समय गर्भावस्था के 11वें सप्ताह से 13 सप्ताह 6 दिन के बीच होता है।

    इसी समय यह टेस्ट सबसे अधिक सटीक जानकारी देता है। इसलिए डॉक्टर अक्सर इसी अवधि में NT Scan के साथ यह टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

    सही समय

    • 11 सप्ताह
    • 12 सप्ताह
    • 13 सप्ताह 6 दिन तक

    डबल मार्कर टेस्ट में क्या जांच होती है?

    इस टेस्ट में मां के खून में मौजूद दो महत्वपूर्ण तत्वों की जांच की जाती है।

    1. Free Beta hCG

    यह एक प्रेग्नेंसी हार्मोन है। इसकी मात्रा सामान्य से अधिक या कम होने पर कुछ क्रोमोसोमल समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

    2. PAPP-A

    यह एक प्रोटीन है जो गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा (Placenta) बनाता है। यदि इसकी मात्रा कम हो, तो कुछ आनुवंशिक समस्याओं या गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।

    दोनों की रिपोर्ट को साथ में देखकर डॉक्टर निष्कर्ष निकालते हैं।


    डबल मार्कर टेस्ट कैसे किया जाता है?

    यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है।

    इसकी प्रक्रिया बहुत आसान होती है।

    • हाथ की नस से थोड़ा सा खून लिया जाता है।
    • खून का सैंपल लैब में भेजा जाता है।
    • वहां दोनों मार्कर्स की जांच की जाती है।
    • रिपोर्ट तैयार होने के बाद डॉक्टर उसे समझाते हैं।

    अच्छी बात

    इस टेस्ट में बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता।


    क्या डबल मार्कर टेस्ट के लिए खाली पेट रहना जरूरी है?

    नहीं।

    अधिकतर मामलों में फास्टिंग (खाली पेट रहना) जरूरी नहीं होती।

    फिर भी टेस्ट से पहले डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन जरूर करें।


    किन महिलाओं को डबल मार्कर टेस्ट कराना चाहिए?

    यह टेस्ट कई गर्भवती महिलाओं को सलाह दिया जाता है, लेकिन कुछ महिलाओं के लिए यह और भी अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    जैसे:

    • 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की गर्भवती महिला
    • पहले बच्चे में जेनेटिक समस्या रही हो
    • परिवार में आनुवंशिक बीमारी का इतिहास हो
    • NT Scan में कोई असामान्यता दिखाई दे
    • बार-बार गर्भपात हुआ हो
    • IVF Pregnancy हो (यदि डॉक्टर सलाह दें)

    डबल मार्कर टेस्ट की रिपोर्ट कैसे समझें?

    इस टेस्ट की कोई एक नॉर्मल वैल्यू नहीं होती।

    रिपोर्ट तैयार करते समय कई बातों को ध्यान में रखा जाता है:

    • मां की उम्र
    • गर्भावस्था का सप्ताह
    • वजन
    • Free Beta hCG
    • PAPP-A
    • NT Scan रिपोर्ट

    रिपोर्ट में आमतौर पर लिखा होता है:

    • Low Risk
    • High Risk

    अगर डबल मार्कर टेस्ट में हाई रिस्क आए तो क्या करें?

    यदि रिपोर्ट में High Risk आता है तो घबराने की जरूरत नहीं है।

    इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को निश्चित रूप से कोई बीमारी है।

    इसका मतलब केवल इतना है कि डॉक्टर आगे की जांच की सलाह देंगे।

    जैसे:

    • NIPT
    • CVS
    • Amniocentesis
    • Detailed Ultrasound

    कई बार हाई रिस्क रिपोर्ट आने के बाद भी बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होता है।


    डबल मार्कर टेस्ट कितना सही होता है?

    यह एक Screening Test है।

    यह केवल जोखिम का अनुमान लगाता है।

    यदि इसे NT Scan के साथ किया जाए, तो इसकी सटीकता बेहतर होती है।

    यदि रिपोर्ट में अधिक जोखिम दिखाई देता है, तो डॉक्टर पुष्टि के लिए अन्य टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।


    डबल मार्कर टेस्ट के फायदे

    यह टेस्ट गर्भावस्था के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारी देता है।

    मुख्य फायदे

    • बच्चे में जेनेटिक बीमारी के जोखिम का जल्दी पता चलता है।
    • मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित टेस्ट है।
    • सिर्फ ब्लड सैंपल से किया जाता है।
    • आगे की जांच की जरूरत का पता चलता है।
    • समय रहते सही इलाज और सलाह मिल सकती है।

    क्या डबल मार्कर टेस्ट सुरक्षित है?

    हाँ।

    यह केवल ब्लड टेस्ट है।

    इससे मां या बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता।

    सिर्फ सुई लगाने वाली जगह पर हल्का दर्द या नीला निशान बन सकता है, जो कुछ समय बाद ठीक हो जाता है।

    मैक्स लैब आपकी कैसे मदद कर सकता है?

    गर्भावस्था के दौरान सही समय पर सही जांच कराना मां और बच्चे दोनों की बेहतर देखभाल के लिए जरूरी होता है। Max Lab में Double Marker Test आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाता है, जिससे आपको सटीक और भरोसेमंद रिपोर्ट मिलती है।

    मैक्स लैब में आपको ऑनलाइन टेस्ट बुकिंग, होम सैंपल कलेक्शन (जहां उपलब्ध हो), समय पर रिपोर्ट, NABL मान्यता प्राप्त लैब और देशभर में फैले डायग्नोस्टिक सेंटर जैसी सुविधाएं मिलती हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर गर्भावस्था की आगे की देखभाल की सही योजना बना सकते हैं।

    नोट: डबल मार्कर टेस्ट एक स्क्रीनिंग टेस्ट है। इसकी रिपोर्ट को हमेशा डॉक्टर की सलाह और अन्य जांचों के साथ मिलाकर ही समझना चाहिए।

     

    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    यह गर्भावस्था में किया जाने वाला ब्लड टेस्ट है, जो बच्चे में कुछ जेनेटिक बीमारियों के जोखिम का पता लगाने में मदद करता है।

    यह टेस्ट 11 से 13 सप्ताह 6 दिन के बीच कराया जाता है।

    नहीं, अधिकतर मामलों में फास्टिंग की जरूरत नहीं होती।

    यह बच्चे में डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड सिंड्रोम और पटाउ सिंड्रोम जैसी समस्याओं के जोखिम का पता लगाने के लिए किया जाता है।

    नहीं। यह केवल जोखिम बताता है, बीमारी की पुष्टि नहीं करता।

    अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर NIPT, CVS या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

    हाँ, यह मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित ब्लड टेस्ट है।

    यह आपके डॉक्टर की सलाह, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करता है।

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    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    यह गर्भावस्था में किया जाने वाला ब्लड टेस्ट है, जो बच्चे में कुछ जेनेटिक बीमारियों के जोखिम का पता लगाने में मदद करता है।

    यह टेस्ट 11 से 13 सप्ताह 6 दिन के बीच कराया जाता है।

    नहीं, अधिकतर मामलों में फास्टिंग की जरूरत नहीं होती।

    यह बच्चे में डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड सिंड्रोम और पटाउ सिंड्रोम जैसी समस्याओं के जोखिम का पता लगाने के लिए किया जाता है।

    नहीं। यह केवल जोखिम बताता है, बीमारी की पुष्टि नहीं करता।

    अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर NIPT, CVS या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

    हाँ, यह मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित ब्लड टेस्ट है।

    यह आपके डॉक्टर की सलाह, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करता है।

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