Loader
logo
Cart Call

Home > Blog > पीसीओडी क्या होता है? कारण, लक्षण और इलाज

पीसीओडी क्या होता है? कारण, लक्षण और इलाज

पीसीओडी क्या होता है? कारण, लक्षण और इलाज

By - Max Lab

Updated on: Feb 25, 2026 | 16 min read

Table of Contents

    पीसीओडी (Polycystic Ovarian Disease) महिलाओं में होने वाली एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण हार्मोनल समस्या है। यह मुख्य रूप से प्रजनन आयु (15–45 वर्ष) की महिलाओं को प्रभावित करती है। इस स्थिति में अंडाशय (Ovaries) में कई छोटे-छोटे सिस्ट (थैलीनुमा संरचनाएं) बनने लगते हैं और हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है।

    पीसीओडी के कारण अंडाशय नियमित रूप से अंडाणु (Egg) रिलीज नहीं कर पाते, जिससे मासिक धर्म (पीरियड्स) अनियमित हो जाते हैं और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। आजकल बदलती जीवनशैली, तनाव, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण युवतियों में भी पीसीओडी के मामले बढ़ रहे हैं।

    पीसीओडी क्यों होता है?

    पीसीओडी का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके पीछे कई प्रमुख कारण माने जाते हैं:

    1. हार्मोनल असंतुलन

    पीसीओडी में शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे ओव्यूलेशन (अंडाणु रिलीज) प्रभावित होता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।

    2. इंसुलिन रेजिस्टेंस

    जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। इससे हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है और अंडाशय अधिक एंड्रोजन बनाने लगते हैं।

    3. अनुवांशिक कारण

    यदि परिवार में किसी महिला को पीसीओडी है, तो अन्य महिलाओं में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

    4. अस्वस्थ जीवनशैली

    जंक फूड, अत्यधिक मीठा, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, नींद की कमी और लगातार तनाव भी पीसीओडी के जोखिम को बढ़ाते हैं।

    पीसीओडी के लक्षण क्या हैं?

    पीसीओडी के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

    • अनियमित या लंबे अंतराल के बाद पीरियड्स आना
    • अत्यधिक या बहुत कम ब्लीडिंग
    • चेहरे, छाती या पेट पर अनचाहे बाल
    • मुंहासे और तैलीय त्वचा
    • वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास
    • बालों का झड़ना या पतले होना
    • गर्भधारण में कठिनाई

    कई बार लक्षण हल्के होते हैं और महिलाएं उन्हें नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन लंबे समय तक अनियमित पीरियड्स को अनदेखा करना सही नहीं है।

    पीसीओडी का निदान कैसे किया जाता है?

    पीसीओडी की सही पहचान के लिए डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं:

    ब्लड टेस्ट

    हार्मोन लेवल, इंसुलिन और ब्लड शुगर की जांच की जाती है।

    पेल्विक अल्ट्रासाउंड

    अल्ट्रासाउंड के माध्यम से ओवरी में सिस्ट की मौजूदगी देखी जाती है।

    मेडिकल हिस्ट्री

    डॉक्टर पीरियड्स का इतिहास, वजन में बदलाव और अन्य लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं।

    सही और समय पर निदान से उपचार आसान हो जाता है।

    क्या पीसीओडी से गर्भधारण में समस्या होती है?

    हाँ, पीसीओडी ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है। जब अंडाणु नियमित रूप से रिलीज नहीं होते, तो प्रेग्नेंसी की संभावना कम हो सकती है।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गर्भधारण असंभव है। सही इलाज, दवाइयों और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से कई महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भवती होती हैं। वजन कम करना और हार्मोन संतुलित रखना गर्भधारण की संभावना बढ़ा सकता है।

    पीसीओडी का इलाज क्या है?

    पीसीओडी का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार महिला के लक्षण, उम्र और गर्भधारण की योजना पर निर्भर करता है।

    1. जीवनशैली में बदलाव

    • संतुलित और पौष्टिक आहार
    • कम शुगर और कम प्रोसेस्ड फूड
    • रोजाना 30–45 मिनट व्यायाम
    • योग और मेडिटेशन
    • पर्याप्त नींद

    सिर्फ 5–10% वजन कम करने से भी लक्षणों में सुधार देखा जा सकता है।

    2. दवाइयाँ

    • पीरियड्स नियमित करने की दवाइयाँ
    • हार्मोन संतुलन की दवाइयाँ
    • इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने की दवाइयाँ
    • ओव्यूलेशन को बढ़ाने की दवाइयाँ (यदि गर्भधारण की योजना हो)

    इलाज हमेशा स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए।

    क्या पीसीओडी खतरनाक है?

    पीसीओडी सीधे जानलेवा नहीं है, लेकिन यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे:

    • टाइप 2 डायबिटीज
    • हाई ब्लड प्रेशर
    • हृदय रोग
    • कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
    • मानसिक तनाव और डिप्रेशन

    इसलिए इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।

    पीसीओडी से बचाव और मैनेजमेंट कैसे करें?

    हालांकि पीसीओडी को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

    • रोजाना व्यायाम करें
    • संतुलित और हाई-फाइबर डाइट लें
    • मीठे और तले हुए भोजन से बचें
    • वजन नियंत्रित रखें
    • पर्याप्त नींद लें
    • नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं

    तनाव कम करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है।

    पीसीओडी कितने समय में नियंत्रित होता है?

    पीसीओडी कुछ दिनों में ठीक नहीं होता। आमतौर पर 3 से 6 महीनों में जीवनशैली सुधार और सही इलाज से लक्षणों में सुधार दिखने लगता है। यह एक दीर्घकालिक (Long-term) कंडीशन है, इसलिए निरंतर देखभाल और अनुशासन जरूरी है।

    निष्कर्ष

    पीसीओडी एक आम लेकिन गंभीर हार्मोनल समस्या है, जो महिलाओं के मासिक धर्म, वजन, त्वचा और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। अनियमित पीरियड्स, मुंहासे, वजन बढ़ना या गर्भधारण में कठिनाई जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

    सही समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से पीसीओडी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली ही इसके प्रबंधन की कुंजी है।

    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    पीसीओडी कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो कुछ दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाए। यह एक हार्मोनल कंडीशन है जिसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से 3–6 महीनों में इसके लक्षणों में सुधार दिखने लगता है। नियमित दवा, संतुलित आहार और व्यायाम से इसे लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

    पीसीओडी (Polycystic Ovarian Disease) में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है। यह मुख्य रूप से ओवरी से जुड़ी समस्या है। वहीं, पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) एक अधिक जटिल हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं। सरल शब्दों में, PCOS आमतौर पर PCOD से अधिक गंभीर माना जाता है।

    पीसीओडी का स्थायी इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
    उपचार में शामिल हो सकते हैं:

    • हार्मोन संतुलित करने की दवाइयाँ
    • पीरियड्स नियमित करने की दवाइयाँ
    • इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने की दवाइयाँ
    • जीवनशैली में बदलाव (डाइट और एक्सरसाइज)

    डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करने से लक्षण काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।

    हाँ, PCOD होने के बावजूद गर्भधारण संभव है। हालांकि ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है, लेकिन दवाइयों और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से अंडाणु रिलीज को नियमित किया जा सकता है। समय पर उपचार और स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी में कई महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भवती होती हैं।

    पीसीओडी का निदान निम्न तरीकों से किया जाता है:

    • ब्लड टेस्ट (हार्मोन और शुगर लेवल की जांच)
    • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (ओवरी में सिस्ट की जांच)
    • पीरियड्स और लक्षणों का मेडिकल इतिहास

    डॉक्टर लक्षणों और जांच रिपोर्ट के आधार पर सही निदान करते हैं।

    PCOD को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मैनेजमेंट के लिए:

    • संतुलित और कम शुगर वाला आहार लें
    • रोजाना 30–45 मिनट व्यायाम करें
    • वजन नियंत्रित रखें
    • पर्याप्त नींद लें
    • तनाव कम करें
    • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं

    स्वस्थ जीवनशैली PCOD को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    Want to book a Blood Test?

    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    पीसीओडी कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो कुछ दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाए। यह एक हार्मोनल कंडीशन है जिसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से 3–6 महीनों में इसके लक्षणों में सुधार दिखने लगता है। नियमित दवा, संतुलित आहार और व्यायाम से इसे लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

    पीसीओडी (Polycystic Ovarian Disease) में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है। यह मुख्य रूप से ओवरी से जुड़ी समस्या है। वहीं, पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) एक अधिक जटिल हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं। सरल शब्दों में, PCOS आमतौर पर PCOD से अधिक गंभीर माना जाता है।

    पीसीओडी का स्थायी इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
    उपचार में शामिल हो सकते हैं:

    • हार्मोन संतुलित करने की दवाइयाँ
    • पीरियड्स नियमित करने की दवाइयाँ
    • इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने की दवाइयाँ
    • जीवनशैली में बदलाव (डाइट और एक्सरसाइज)

    डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करने से लक्षण काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।

    हाँ, PCOD होने के बावजूद गर्भधारण संभव है। हालांकि ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है, लेकिन दवाइयों और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से अंडाणु रिलीज को नियमित किया जा सकता है। समय पर उपचार और स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी में कई महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भवती होती हैं।

    पीसीओडी का निदान निम्न तरीकों से किया जाता है:

    • ब्लड टेस्ट (हार्मोन और शुगर लेवल की जांच)
    • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (ओवरी में सिस्ट की जांच)
    • पीरियड्स और लक्षणों का मेडिकल इतिहास

    डॉक्टर लक्षणों और जांच रिपोर्ट के आधार पर सही निदान करते हैं।

    PCOD को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मैनेजमेंट के लिए:

    • संतुलित और कम शुगर वाला आहार लें
    • रोजाना 30–45 मिनट व्यायाम करें
    • वजन नियंत्रित रखें
    • पर्याप्त नींद लें
    • तनाव कम करें
    • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं

    स्वस्थ जीवनशैली PCOD को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    Comments


    Leave a Comment

    new health articles

    ब्लैक कॉफी के फायदे: शरीर और मन दोनों के लिए वरदान

    ब्लैक कॉफी के फायदे: शरीर और मन दोनों के लिए वरदान

    मेथी दाना के 5 चौंकाने वाले स्वास्थ्य लाभ

    मेथी दाना के 5 चौंकाने वाले स्वास्थ्य लाभ

    पेट दर्द के घरेलू उपाय – 5 प्राकृतिक नुस्खे

    पेट दर्द के घरेलू उपाय – 5 प्राकृतिक नुस्खे

    यूरिक एसिड में परहेज़ करने वाले खाद्य पदार्थ – उच्च और निम्न स्तर

    यूरिक एसिड में परहेज़ करने वाले खाद्य पदार्थ – उच्च और निम्न स्तर

    सूखी खांसी के लिए घरेलू उपाय

    सूखी खांसी के लिए घरेलू उपाय

    गोक्षुरा – फायदे, प्रकार और संभावित उपयोग

    गोक्षुरा – फायदे, प्रकार और संभावित उपयोग

    Get a Call Back from our Health Advisor

    LOGIN

    Get access to your orders, lab tests

    OTP will be sent to this number by SMS

    Not Registered Yet? Signup now.

    ENTER OTP

    OTP sent successfully to your mobile number

    Didn't receive OTP? Resend Now

    Welcome to Max Lab

    Enter your details to proceed

    MALE
    FEMALE
    OTHER