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मुलेठी के फायदे (Mulethi ke Fayde): उपयोग, लाभ और नुकसान

मुलेठी के फायदे (Mulethi ke Fayde): उपयोग, लाभ और नुकसान

By - Max Lab

Updated on: Sep 29, 2026 | 21 min read

Table of Contents

    परिचय

    भारतीय रसोई और आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल होने वाली मुलेठी एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसे लोग आमतौर पर गले की खराश और खांसी के घरेलू इलाज के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि mulethi ke fayde सिर्फ गले तक सीमित नहीं हैं? आज जब हर कोई प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लौट रहा है, तब मुलेठी के फायदे एक बार फिर चर्चा में हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि mulethi kya hota h और इसे अपनी दिनचर्या में कैसे शामिल किया जाए, तो यह लेख आपके लिए ही है। मुलेठी को अंग्रेज़ी में लिकोरिस (Licorice) कहा जाता है और इसकी जड़ का स्वाद हल्का मीठा होता है। आयुर्वेद में इसे 'यष्टिमधु' भी कहते हैं। लोग इसे चूसकर, काढ़े में डालकर या चूर्ण बनाकर खाते हैं। mulethi khane ke fayde में पाचन को सहारा देना, गले को आराम पहुंचाना और शरीर में ऊर्जा बनाए रखना शामिल माना जाता है। इसी तरह मुलेठी पाउडर के फायदे भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि पाउडर को शहद, दूध या गुनगुने पानी के साथ आसानी से लिया जा सकता है। हालांकि, हर घरेलू नुस्खे की तरह इसके साथ कुछ सावधानियां भी जुड़ी हैं। मुलेठी के नुकसान को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं है, क्योंकि ज़्यादा मात्रा में लेने पर यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और शरीर में पोटैशियम का स्तर घटा सकती है। इसलिए मुलेठी खाने के फायदे तभी मिलते हैं, जब इसका सेवन सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए। इस लेख में हम mulethi ke fayde aur nuksan दोनों को सरल भाषा में समझेंगे, साथ ही mulethi ke upyog की पूरी जानकारी देंगे। आगे आपको बताया जाएगा कि मुलेठी का सेवन कैसे करें, इसका सही समय क्या है, किन लोगों को इससे दूर रहना चाहिए और कौन-से सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, इसलिए नियमित रूप से मुलेठी शुरू करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह ज़रूर लें।
     

    मुलेठी क्या है?

    मुलेठी एक बहुवर्षीय पौधे (Glycyrrhiza glabra) की सूखी जड़ है। अगर आप पूछें कि mulethi kya hota h, तो सरल जवाब है कि यह एक मीठी, औषधीय जड़ है जिसमें ग्लाइसिरिज़िन नामक तत्व पाया जाता है। यही तत्व इसकी मिठास और औषधीय गुणों का कारण है, और यही ज़्यादा मात्रा में नुकसान भी कर सकता है।
     

    मुलेठी के फायदे क्या हैं?

    पारंपरिक उपयोग के आधार पर मुलेठी के फायदे कई माने जाते हैं, हालांकि इनमें से कई पर वैज्ञानिक शोध अभी सीमित है। सबसे जाना-पहचाना फायदा गले की खराश और खांसी में राहत है। मुलेठी चूसने से गले को नमी और आराम मिलता है, इसीलिए mulethi ke upyog में यह सबसे आम है। पाचन के मामले में भी इसे पेट की जलन, एसिडिटी और अपच में सहारा देने वाला माना जाता है। मुंह के छालों में मुलेठी का गुनगुना काढ़ा या उससे किए गए गरारे परेशानी कम कर सकते हैं।

    मुलेठी खाने के फायदे रोग प्रतिरोधक क्षमता तक भी पहुंचते हैं, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मौसमी संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद कर सकते हैं। त्वचा की बात करें तो मुलेठी पाउडर के फायदे में सूजन और दाग-धब्बों में मदद भी गिनी जाती है, इसलिए इसे फेस पैक में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद इसे थकान और तनाव में ऊर्जा देने वाली जड़ी-बूटी मानता है, और इसके सूजन-रोधी गुण जोड़ों व श्वसन तंत्र की परेशानी में सहायक समझे जाते हैं।
     

    मुलेठी का सेवन कैसे करें?

    मुलेठी का सेवन कैसे करें, यह आपकी ज़रूरत पर निर्भर करता है। गले की परेशानी में जड़ का छोटा टुकड़ा चूसना आसान तरीका है, जबकि पाचन या सर्दी-खांसी में पाउडर या काढ़ा ज़्यादा उपयोगी माना जाता है।

    तरीका

    विधि

    सामान्य मात्रा

    चूसना

    जड़ का छोटा टुकड़ा मुंह में रखें

    1 छोटा टुकड़ा, दिन में 1-2 बार

    पाउडर

    शहद या गुनगुने पानी के साथ लें

    लगभग 1-2 ग्राम

    काढ़ा

    1 चम्मच पाउडर 1 कप पानी में उबालें

    दिन में 1 कप

    मुलेठी चाय

    अदरक-तुलसी के साथ उबालें

    दिन में 1 कप

    मात्रा उम्र और सेहत के अनुसार बदल सकती है, इसलिए वैद्य से पूछकर ही तय करें।
     

    मुलेठी का सेवन करने का सही समय

    मुलेठी पाउडर सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। खांसी या गले की खराश में रात को सोने से पहले गुनगुने दूध या शहद के साथ इसे लेना आम तरीका है। ध्यान रखें कि इसे कुछ हफ्तों से ज़्यादा लगातार न लें और बीच में अंतराल रखें, ताकि मुलेठी के नुकसान का जोखिम न बढ़े।
     

    मुलेठी का सेवन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?

    गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मुलेठी से दूर रहना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग के मरीज़, किडनी या लिवर की बीमारी वाले लोग और जिनके शरीर में पोटैशियम कम रहता है, उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग मूत्रवर्धक (diuretic) या BP की दवा ले रहे हैं, उनके लिए भी यह जोखिम भरा हो सकता है। छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के मुलेठी न दें।
     

    मुलेठी के फायदे और नुकसान

    फायदे

    नुकसान (ज़्यादा या लंबे सेवन से)

    गले और खांसी में आराम

    ब्लड प्रेशर बढ़ना

    पाचन और एसिडिटी में सहारा

    शरीर में पोटैशियम की कमी

    मुंह के छालों में राहत

    हाथ-पैरों में सूजन, पानी रुकना

    त्वचा और इम्यूनिटी में मदद

    कमज़ोरी और मांसपेशियों में ऐंठन

    इसलिए mulethi ke fayde aur nuksan दोनों को समझकर ही इसका इस्तेमाल करें।
     

    मुलेठी से जुड़े सामान्य सवाल

    1. क्या रोज़ मुलेठी खा सकते हैं?
    कम मात्रा में और थोड़े समय के लिए ठीक है, लेकिन रोज़ लंबे समय तक लेने पर मुलेठी के नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है।

    2. क्या मुलेठी वज़न घटाने में मदद करती है?
    इसका कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, इसलिए इसे वज़न घटाने का उपाय न मानें।

    3. क्या मुलेठी पाउडर के फायदे कैप्सूल में भी मिलते हैं?
    हां, बाज़ार में DGL (ग्लाइसिरिज़िन-रहित) रूप भी मिलता है, जिसमें BP बढ़ने का खतरा कम होता है। फिर भी डॉक्टर से पूछना बेहतर है।

    4. मुलेठी खाने के बाद क्या परहेज़ करें?
    ज़्यादा नमक और अलग से लिकोरिस वाली चीज़ें कम लें।
     

    निष्कर्ष

    मुलेठी एक असरदार पारंपरिक जड़ी-बूटी है, और मुलेठी खाने के फायदे गले, पाचन और त्वचा तक फैले हैं। लेकिन इसके साथ मुलेठी के नुकसान भी जुड़े हैं, इसलिए सही मात्रा, सही समय और सावधानी के साथ ही इसका लाभ लें। अगर आपको BP, किडनी या हृदय से जुड़ी कोई समस्या है, या आप नियमित रूप से मुलेठी लेने की सोच रहे हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें और ज़रूरत हो तो BP या पोटैशियम जैसी जांच करवा लें। इससे आप मुलेठी का इस्तेमाल ज़्यादा सुरक्षित तरीके से कर पाएंगे।

    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    आयुर्वेद में मुलेठी को सदियों से गले, पाचन और सर्दी-खांसी की परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें ग्लाइसिरिज़िन और फ्लेवोनॉइड जैसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जिनके सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण माने जाते हैं। इसी वजह से यह गले को आराम देने और पेट की जलन में सहारा देने वाली जड़ी-बूटी मानी जाती है। हालांकि इनमें से कई फायदों पर वैज्ञानिक शोध अभी सीमित है।

    मुलेठी में मुख्य रूप से ग्लाइसिरिज़िन होता है, जो इसकी मिठास का कारण है। इसके अलावा इसमें फ्लेवोनॉइड, ग्लैब्रिडिन, सैपोनिन, कुछ प्राकृतिक शर्करा और स्टार्च पाए जाते हैं। ये तत्व इसके औषधीय गुणों में योगदान देते हैं। मुलेठी को विटामिन या मिनरल का मुख्य स्रोत नहीं माना जाता, इसलिए इसे पोषण की जगह जड़ी-बूटी की तरह लेना चाहिए।

    घर पर पाउडर बनाने के लिए सूखी मुलेठी की जड़ों को पहले अच्छी तरह साफ करके छोटे टुकड़ों में काट लें। अगर जड़ें पूरी तरह सूखी न हों, तो उन्हें छांव में सुखा लें। फिर टुकड़ों को मिक्सर या ग्राइंडर में बारीक पीसें और छलनी से छान लें। तैयार पाउडर को साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। जड़ हमेशा भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें।

    हां, कम मात्रा में और थोड़े समय के लिए मुलेठी की चाय ली जा सकती है। आमतौर पर एक कप पानी में आधा से एक चम्मच पाउडर या एक छोटा टुकड़ा अदरक और तुलसी के साथ उबालकर पिया जाता है। दिन में एक कप से ज़्यादा न लें। हाई बीपी, हृदय या किडनी की समस्या वाले लोग इसे न पिएं।

    पारंपरिक रूप से गले की खराश और सूखी खांसी में मुलेठी सबसे आम घरेलू उपाय है। जड़ का छोटा टुकड़ा चूसने से गले में नमी बनी रहती है और खराश में आराम मिल सकता है। गुनगुने पानी में इसका काढ़ा बनाकर गरारे करना भी कई लोग अपनाते हैं। अगर खराश या खांसी कई दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

    आयुर्वेद में मुलेठी को पेट की जलन, एसिडिटी और अपच में सहारा देने वाला माना गया है। यह पेट की अंदरूनी परत को आराम देने वाली मानी जाती है। इसके लिए कई बार DGL (ग्लाइसिरिज़िन-रहित) रूप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बीपी बढ़ने का खतरा कम होता है। फिर भी लगातार एसिडिटी या पेट दर्द रहे, तो बिना जांच के सिर्फ घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें।

    मुलेठी का सेवन आमतौर पर कुछ हफ्तों तक ही सीमित रखना बेहतर माना जाता है, और बीच में अंतराल देना चाहिए। लंबे समय तक या ज़्यादा मात्रा में लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ना, शरीर में पोटैशियम की कमी और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सही अवधि आपकी उम्र, सेहत और दवाओं पर निर्भर करती है, इसलिए वैद्य या डॉक्टर से पूछकर तय करें।

    छोटे बच्चों को मुलेठी बिना डॉक्टर या वैद्य की सलाह के नहीं देनी चाहिए। बच्चों के लिए सही मात्रा तय करना मुश्किल होता है, और ज़्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है। अगर बच्चे को खांसी या गले की परेशानी है, तो पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और उनके बताए अनुसार ही कोई उपाय अपनाएं।

    गर्भावस्था में मुलेठी का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता। कुछ अध्ययनों में ज़्यादा मात्रा में लिकोरिस के सेवन को समय से पहले प्रसव के जोखिम और शिशु के विकास पर असर से जोड़ा गया है। इसलिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मुलेठी, उसकी चाय और उससे बने उत्पादों से दूर रहना चाहिए।

    हां, खासकर अगर आपको हाई बीपी, हृदय रोग, किडनी या लिवर की समस्या है, या आप बीपी या मूत्रवर्धक (पेशाब बढ़ाने वाली) दवाएं ले रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए भी सलाह लेना ज़रूरी है। डॉक्टर आपकी सेहत देखकर सही मात्रा और अवधि बता सकते हैं। इससे मुलेठी के फायदे लेते हुए नुकसान का जोखिम कम रहता है।

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    Frequently Asked Questions (FAQ's)

    आयुर्वेद में मुलेठी को सदियों से गले, पाचन और सर्दी-खांसी की परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें ग्लाइसिरिज़िन और फ्लेवोनॉइड जैसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जिनके सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण माने जाते हैं। इसी वजह से यह गले को आराम देने और पेट की जलन में सहारा देने वाली जड़ी-बूटी मानी जाती है। हालांकि इनमें से कई फायदों पर वैज्ञानिक शोध अभी सीमित है।

    मुलेठी में मुख्य रूप से ग्लाइसिरिज़िन होता है, जो इसकी मिठास का कारण है। इसके अलावा इसमें फ्लेवोनॉइड, ग्लैब्रिडिन, सैपोनिन, कुछ प्राकृतिक शर्करा और स्टार्च पाए जाते हैं। ये तत्व इसके औषधीय गुणों में योगदान देते हैं। मुलेठी को विटामिन या मिनरल का मुख्य स्रोत नहीं माना जाता, इसलिए इसे पोषण की जगह जड़ी-बूटी की तरह लेना चाहिए।

    घर पर पाउडर बनाने के लिए सूखी मुलेठी की जड़ों को पहले अच्छी तरह साफ करके छोटे टुकड़ों में काट लें। अगर जड़ें पूरी तरह सूखी न हों, तो उन्हें छांव में सुखा लें। फिर टुकड़ों को मिक्सर या ग्राइंडर में बारीक पीसें और छलनी से छान लें। तैयार पाउडर को साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। जड़ हमेशा भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें।

    हां, कम मात्रा में और थोड़े समय के लिए मुलेठी की चाय ली जा सकती है। आमतौर पर एक कप पानी में आधा से एक चम्मच पाउडर या एक छोटा टुकड़ा अदरक और तुलसी के साथ उबालकर पिया जाता है। दिन में एक कप से ज़्यादा न लें। हाई बीपी, हृदय या किडनी की समस्या वाले लोग इसे न पिएं।

    पारंपरिक रूप से गले की खराश और सूखी खांसी में मुलेठी सबसे आम घरेलू उपाय है। जड़ का छोटा टुकड़ा चूसने से गले में नमी बनी रहती है और खराश में आराम मिल सकता है। गुनगुने पानी में इसका काढ़ा बनाकर गरारे करना भी कई लोग अपनाते हैं। अगर खराश या खांसी कई दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

    आयुर्वेद में मुलेठी को पेट की जलन, एसिडिटी और अपच में सहारा देने वाला माना गया है। यह पेट की अंदरूनी परत को आराम देने वाली मानी जाती है। इसके लिए कई बार DGL (ग्लाइसिरिज़िन-रहित) रूप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बीपी बढ़ने का खतरा कम होता है। फिर भी लगातार एसिडिटी या पेट दर्द रहे, तो बिना जांच के सिर्फ घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें।

    मुलेठी का सेवन आमतौर पर कुछ हफ्तों तक ही सीमित रखना बेहतर माना जाता है, और बीच में अंतराल देना चाहिए। लंबे समय तक या ज़्यादा मात्रा में लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ना, शरीर में पोटैशियम की कमी और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सही अवधि आपकी उम्र, सेहत और दवाओं पर निर्भर करती है, इसलिए वैद्य या डॉक्टर से पूछकर तय करें।

    छोटे बच्चों को मुलेठी बिना डॉक्टर या वैद्य की सलाह के नहीं देनी चाहिए। बच्चों के लिए सही मात्रा तय करना मुश्किल होता है, और ज़्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है। अगर बच्चे को खांसी या गले की परेशानी है, तो पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और उनके बताए अनुसार ही कोई उपाय अपनाएं।

    गर्भावस्था में मुलेठी का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता। कुछ अध्ययनों में ज़्यादा मात्रा में लिकोरिस के सेवन को समय से पहले प्रसव के जोखिम और शिशु के विकास पर असर से जोड़ा गया है। इसलिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मुलेठी, उसकी चाय और उससे बने उत्पादों से दूर रहना चाहिए।

    हां, खासकर अगर आपको हाई बीपी, हृदय रोग, किडनी या लिवर की समस्या है, या आप बीपी या मूत्रवर्धक (पेशाब बढ़ाने वाली) दवाएं ले रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए भी सलाह लेना ज़रूरी है। डॉक्टर आपकी सेहत देखकर सही मात्रा और अवधि बता सकते हैं। इससे मुलेठी के फायदे लेते हुए नुकसान का जोखिम कम रहता है।

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