गर्भावस्था का सप्ताह 36
गर्भावस्था का 36वाँ सप्ताह आपको पूरे समय (फुल टर्म) के बहुत करीब ले आता है। इस समय आपका शिशु जन्म के बाद की ज़िंदगी के लिए आख़िरी तैयारियाँ कर रहा होता है। डॉक्टर गर्भावस्था की गिनती आपके आख़िरी माहवारी (पीरियड) के पहले दिन से करते हैं। 36वें सप्ताह में शिशु का आकार अक्सर रोमेन लेट्यूस (सलाद पत्ते) के बड़े गुच्छे या पपीते जितना माना जाता है।
36वें सप्ताह को समझने से आपको पता चलता है कि आपके शरीर में क्या हो रहा है। इस दौरान शिशु जन्म के लिए सही स्थिति में आना शुरू कर सकता है।
गर्भावस्था के 36वें सप्ताह में क्या होता है?
36वें सप्ताह तक शिशु के ज़्यादातर लैनुगो बाल (शरीर के नरम रोएँ) झड़ चुके होते हैं। शिशु की त्वचा पर लगी सुरक्षा वाली सफ़ेद परत (वर्निक्स) भी जन्म की तैयारी में पतली होने लगती है। इस समय कई शिशु सिर नीचे की ओर करके सही स्थिति में आने लगते हैं, हालाँकि हर शिशु की स्थिति अलग हो सकती है।
जैसे-जैसे शिशु का वज़न बढ़ता है, उसकी हलचल पहले से अलग महसूस हो सकती है, लेकिन वह नियमित रूप से महसूस होती रहनी चाहिए।
गर्भावस्था के 36वें सप्ताह में क्या लक्षण होते हैं?
इस सप्ताह के लक्षण अक्सर बढ़ते पेट और प्रसव (डिलीवरी) के पास आने की वजह से होते हैं।
- पेड़ू (पेल्विस) में दबाव बढ़ना
शिशु जब नीचे की ओर आने लगता है, तो पेड़ू में दबाव ज़्यादा महसूस हो सकता है।
- ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन ज़्यादा होना
पूरे समय के करीब आने पर बच्चेदानी का हल्का और बिना तय समय का कसाव ज़्यादा बार होने लगता है।
- साँस फूलना कम होना
कुछ महिलाओं में साँस फूलना थोड़ा कम हो सकता है, क्योंकि शिशु नीचे आ जाता है और छाती के नीचे की पेशी (डायाफ्राम) पर दबाव घट जाता है।
- बार-बार पेशाब आना
शिशु नीचे आकर मूत्राशय (ब्लैडर) पर दबाव डालता है, इसलिए बार-बार पेशाब आना जारी रह सकता है या बढ़ सकता है।
- पीठ दर्द
जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, पीठ में हल्का दर्द बना रह सकता है।
36वें सप्ताह में शिशु का विकास
- लैनुगो ज़्यादातर झड़ जाता है
शिशु के शरीर को ढकने वाले ज़्यादातर बारीक और नरम बाल अब झड़ चुके होते हैं।
- वर्निक्स पतला होने लगता है
शिशु की त्वचा पर लगी सुरक्षा वाली मोमी परत जन्म के पास आने पर पतली होने लगती है।
- सही स्थिति में आना
कई शिशु जन्म की तैयारी में इस समय सिर नीचे की ओर करके सही स्थिति में आने लगते हैं।
36वें सप्ताह में आपके शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
36वें सप्ताह की ख़ास बात यह है कि शिशु अपनी जगह पर सही स्थिति में आने लगता है और डॉक्टर के पास जाँच के लिए जाना बढ़ जाता है।
- शिशु नीचे आ सकता है
जब शिशु जन्म की स्थिति में आता है, तो आपको लग सकता है कि आपका पेट पहले से नीचे बैठ गया है।
- बच्चेदानी का मुँह (सर्विक्स) तैयार होने लगता है
आपके डॉक्टर बच्चेदानी के मुँह में शुरुआती बदलावों की जाँच कर सकते हैं, जो प्रसव की तैयारी के लिए होते हैं।
- वज़न बढ़ना धीमा होता है
गर्भावस्था के आख़िरी हफ़्तों में वज़न बढ़ना अक्सर थोड़ा धीमा हो जाता है।
36वें सप्ताह में क्या खाना चाहिए?
36वें सप्ताह में पौष्टिक खाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि शिशु जन्म की आख़िरी तैयारियाँ कर रहा होता है।
- आयरन वाली चीज़ें खाएँ
आयरन आपके बढ़ते खून की मात्रा में मदद करता है और थकान से बचाता है। इसके अच्छे स्रोत हैं: कम चर्बी वाला मांस, राजमा-फलियाँ, छोले, दालें और पालक।
- खाने में प्रोटीन लें
प्रोटीन शिशु के तेज़ी से बढ़ते अंगों और ऊतकों (टिशू) के लिए ज़रूरी है। अंडे, मछली, चिकन, पनीर, टोफू, फलियाँ और दालें अच्छे स्रोत हैं।
- थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएँ
जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, छोटे-छोटे भोजन पेट पर दबाव कम करने में मदद करते हैं।
- फाइबर वाली चीज़ें खाएँ
फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज में मौजूद फाइबर इस समय पाचन ठीक रखने में मदद करता है।
- खूब पानी पिएँ
प्रसव के करीब पहुँचते समय भरपूर पानी पीना आपकी सेहत के लिए अच्छा है।
किन खाने की चीज़ों और पदार्थों से बचना चाहिए?
शिशु की आख़िरी तैयारियों के समय कुछ चीज़ों से बचना स्वस्थ गर्भावस्था का ज़रूरी हिस्सा है।
- शराब और तंबाकू
शराब और धूम्रपान बिल्कुल न करें, क्योंकि ये शिशु के विकसित होते दिमाग और अंगों पर असर डाल सकते हैं।
- ज़्यादा कैफ़ीन
कैफ़ीन उतना ही लें जितना आपके डॉक्टर ने बताया हो।
- कच्चा या अधपका खाना
अच्छी तरह पका हुआ खाना खाएँ और साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें। कच्चा या अधपका मांस, कच्चे अंडे, बिना उबाला (बिना पास्चराइज़ किया) दूध और डेयरी चीज़ें, और ज़्यादा पारे (मरकरी) वाली मछली न खाएँ।
- बहुत प्रोसेस किया हुआ खाना
ज़्यादा चीनी, ज़्यादा नमक और अस्वस्थ चर्बी वाली चीज़ें कम खाएँ, और अलग-अलग तरह का पौष्टिक खाना खाने पर ध्यान दें।
36वें सप्ताह में व्यायाम
हल्की-फुल्की हलचल पेड़ू के दबाव को कम करने और आराम देने में मदद कर सकती है, लेकिन अपने शरीर की सुनें और ज़रूरत हो तो आराम करें।
ऐसी गतिविधियाँ चुनें जो आपकी सेहत के हिसाब से आरामदायक हों, और बिना सही सलाह के अचानक भारी व्यायाम शुरू न करें।
- पैदल चलना और हल्का व्यायाम
पैदल चलना सक्रिय रहने का आसान और हल्का तरीका है, और यह शिशु को जन्म की सही स्थिति में आने में मदद कर सकता है।
- स्ट्रेचिंग और योग
हल्की स्ट्रेचिंग और गर्भावस्था के लिए सही योग से शरीर लचीला रहता है, आराम मिलता है और पेड़ू का दबाव कम होता है।
स्वस्थ गर्भावस्था के लिए तैयारी कैसे करें?
36वाँ सप्ताह अपनी तैयारियाँ पूरी करने का अच्छा समय है, क्योंकि यहाँ से कभी भी प्रसव शुरू हो सकता है।
-
अस्पताल का बैग तैयार रखें - देख लें कि अस्पताल का बैग पूरी तरह पैक है और आसानी से मिल जाए।
-
प्रीनेटल विटामिन लेते रहें - डॉक्टर की सलाह के अनुसार फोलिक एसिड वाला प्रीनेटल विटामिन लेते रहें।
-
प्रसव के संकेत जान लें - असली प्रसव पीड़ा के संकेतों के बारे में जान लें, ताकि समय आने पर आप तैयार रहें।
-
पूरा आराम करें - नींद और आराम को ज़रूरी समझें, क्योंकि आपका शरीर प्रसव की तैयारी कर रहा है।
-
तनाव कम करें - ध्यान (मेडिटेशन), हल्का योग या गहरी साँस लेने जैसी आराम देने वाली चीज़ें करें।
36वें सप्ताह में कौन-सी जाँचें और चेकअप ज़रूरी हैं?
आपके डॉक्टर इस समय कुछ जाँचें करवाने की सलाह दे सकते हैं, ताकि शिशु के विकास की पुष्टि हो और आपकी सेहत पर नज़र रखी जा सके।
- ग्रुप B स्ट्रेप टेस्ट (अगर पहले नहीं हुआ हो)
यह जाँच आमतौर पर 35 से 37 सप्ताह के बीच होती है। इसमें एक आम बैक्टीरिया की जाँच होती है, जो नवजात शिशु को असर कर सकता है।
- हर हफ़्ते चेकअप
इस समय के आसपास से डॉक्टर के पास जाँच के लिए अक्सर हर हफ़्ते जाना पड़ता है, ताकि आप और शिशु पर करीबी नज़र रखी जा सके।
- बच्चेदानी के मुँह की जाँच
आपके डॉक्टर प्रसव की तैयारी के लिए बच्चेदानी के मुँह में शुरुआती बदलावों की जाँच शुरू कर सकते हैं।
36वें सप्ताह की देखभाल के आसान सुझाव
कुछ आसान आदतें लक्षणों को सँभालने और शिशु के विकास में मदद कर सकती हैं:
-
फोलिक एसिड वाले प्रीनेटल विटामिन लेते रहें।
-
पेट पर दबाव कम करने के लिए थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएँ।
-
दिन भर खूब पानी पिएँ।
-
भरपूर आराम करें।
-
शराब, धूम्रपान और बिना डॉक्टर की मंज़ूरी वाली दवाओं से बचें।
-
अपने साथ रहने वाले व्यक्ति के साथ प्रसव के संकेतों के बारे में बात कर लें।
-
आराम देने वाले तरीकों से तनाव कम करें।
-
डॉक्टर से पूछे बिना अपने आप दवा न लें।
डॉक्टर से कब मिलें?
कुछ लक्षणों को बिना डॉक्टरी जाँच के नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर आपको योनि से ज़्यादा खून आना, पेट में तेज़ दर्द, तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा चक्कर आना या बेहोशी, बहुत ज़्यादा उल्टी, नियमित और बढ़ती तीव्रता वाले संकुचन, या पानी की थैली फटना (पानी निकलना) जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है या आप नियमित रूप से कोई दवा लेती हैं, तो डिलीवरी की तारीख़ पास आने पर अपने डॉक्टर से अपनी सेहत के बारे में बात करना अच्छा रहता है।
गर्भावस्था के 36वें सप्ताह के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- 36वें सप्ताह में मेरा शिशु कितना बड़ा होता है?
36वें सप्ताह में आपका शिशु आमतौर पर रोमेन लेट्यूस के बड़े गुच्छे या पपीते जितना होता है, और उसके ज़्यादातर लैनुगो बाल अब झड़ चुके होते हैं।
- क्या 36वें सप्ताह में शिशु को पूरे समय का (फुल टर्म) माना जाता है?
अभी नहीं। आमतौर पर फुल टर्म की शुरुआत लगभग 39वें सप्ताह से मानी जाती है। 37वें सप्ताह से पैदा होने वाले शिशुओं को आमतौर पर "अर्ली टर्म" (थोड़ा जल्दी, लेकिन लगभग पूरे समय का) माना जाता है।
- 36वें सप्ताह में डॉक्टर के पास जाना ज़्यादा बार क्यों हो जाता है?
जैसे-जैसे डिलीवरी की तारीख़ पास आती है, डॉक्टर अक्सर हर हफ़्ते जाँच के लिए बुलाते हैं, ताकि आपकी सेहत और शिशु की स्थिति पर करीबी नज़र रखी जा सके।
- 36वें सप्ताह में मुझे क्या खाना चाहिए?
आयरन, प्रोटीन और फाइबर वाली चीज़ें खाएँ, और पेट पर दबाव कम करने के लिए थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएँ।
- क्या मैं 36वें सप्ताह में व्यायाम कर सकती हूँ?
अगर आप स्वस्थ हैं और डॉक्टर ने कोई रोक नहीं लगाई है, तो पैदल चलने और गर्भावस्था के लिए सही योग जैसी हल्की गतिविधियाँ इस समय आपकी सेहत के लिए अच्छी हो सकती हैं।
- 36वें सप्ताह में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
योनि से ज़्यादा खून आना, पेट में तेज़ दर्द, तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा चक्कर आना या बेहोशी, बहुत ज़्यादा उल्टी, नियमित और बढ़ते संकुचन, या पानी की थैली फटना जैसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
Baby Development
- The baby may move lower into the pelvis as the body prepares for birth.
- The baby focuses on weight gain, brain development, lung maturity, and getting ready for birth.
Changes in Mother
- Breathlessness, pelvic pressure, swelling, heartburn, sleep difficulty, and Braxton Hicks contractions may become more noticeable.
- Report reduced fetal movement, bleeding, severe headache, vision changes, or fluid leakage urgently.
Pregnancy Due Date Calculator
Get ready for your baby's arrival with helpful pregnancy calculators.
Common Symptoms
Care Tips This Week
- Confirm delivery plan
- Check baby position if advised
- Keep emergency contacts ready
Recommended Pregnancy Tests
These are common checks for this stage. Always follow your doctor's advice for the exact tests and timing.
Book Pregnancy Tests




Size






To reach our help desk call 7982100200